विषय-सूची (Table of Contents)
- 1. परिचय: राष्ट्र के अदृश्य प्रहरी (Introduction: The Nation’s Unseen Sentinels)
- 2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: वर्दी का विकास (Historical Background: The Evolution of the Uniform)
- 3. पुलिस बल: राज्य की रीढ़ (Police Force: The State’s Backbone)
- 4. अर्धसैनिक बल: केंद्र की शक्ति (Paramilitary Forces: The Center’s Strength)
- 5. पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के बीच समन्वय: एक अनिवार्य आवश्यकता (Coordination Between Police and Paramilitary Forces: A Critical Necessity)
- 6. भर्ती प्रक्रिया और प्रशिक्षण: ढाल को तैयार करना (Recruitment Process and Training: Forging the Shield)
- 7. आधुनिकीकरण और भविष्य की चुनौतियाँ (Modernization and Future Challenges)
- 8. निष्कर्ष: भारत की अजेय ढाल (Conclusion: India’s Invincible Shield)
- 9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
1. परिचय: राष्ट्र के अदृश्य प्रहरी (Introduction: The Nation’s Unseen Sentinels)
कल्पना कीजिए, एक भीड़-भाड़ वाले शहर के बीचों-बीच एक त्योहार का दिन है। चारों ओर उत्सव का माहौल है, लोग खुशियाँ मना रहे हैं, और बच्चे खेल रहे हैं। अचानक, एक अफवाह फैलती है जो सांप्रदायिक तनाव (communal tension) का रूप ले लेती है। माहौल बिगड़ने लगता है, और शांति भंग होने का खतरा मंडराने लगता है। ऐसे नाजुक क्षणों में, खाकी वर्दी में कुछ लोग भीड़ को नियंत्रित करते, लोगों को समझाते और स्थिति को सामान्य करने का प्रयास करते नजर आते हैं। ये राज्य पुलिस के जवान हैं। अब इसी कल्पना को थोड़ा आगे बढ़ाते हैं। मान लीजिए कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है और बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठती है। तब, गहरे हरे या कैमोफ्लाज पैटर्न वाली वर्दी में सशस्त्र जवान आते हैं और कुछ ही घंटों में व्यवस्था बहाल कर देते हैं। ये केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान हैं। यही वह नाजुक संतुलन और सहयोग है, जो भारत की विशाल और जटिल आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखता है। भारत की आंतरिक सुरक्षा की यह विशाल इमारत दो मजबूत स्तंभों पर टिकी है: राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल। ये दोनों मिलकर देश की आंतरिक ढाल बनते हैं। इस लेख में, हम भारत के इसी सुरक्षा तंत्र, यानी पुलिस एवं अर्धसैनिक बल की संरचना, भूमिका, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
जब हम “सुरक्षा” शब्द सुनते हैं, तो हमारा ध्यान अक्सर सीमाओं पर तैनात सेना पर जाता है। लेकिन देश के भीतर, शहरों, कस्बों और गाँवों में शांति, कानून-व्यवस्था और स्थिरता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एक अलग और समान रूप से महत्वपूर्ण बल पर होती है। यह जिम्मेदारी पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के कंधों पर है। वे दिन-रात, चौबीसों घंटे काम करते हैं ताकि हम और आप अपने घरों में सुरक्षित महसूस कर सकें। ये बल न केवल अपराध से लड़ते हैं, बल्कि आपदा प्रबंधन, चुनाव संचालन, और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक और चुनौतियों से भरा है, जो उन्हें भारत की आंतरिक सुरक्षा (internal security) का सबसे महत्वपूर्ण अंग बनाता है। आइए, भारत की इस ढाल के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि ये बल कैसे काम करते हैं और हमारे जीवन को सुरक्षित बनाने में उनका क्या योगदान है।
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: वर्दी का विकास (Historical Background: The Evolution of the Uniform)
प्राचीन और मध्यकालीन भारत में कानून व्यवस्था (Law and Order in Ancient and Medieval India)
भारत में कानून-व्यवस्था की अवधारणा कोई नई नहीं है। प्राचीन काल में, मौर्य साम्राज्य के दौरान, कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में एक सुसंगठित जासूसी और पुलिसिंग प्रणाली का उल्लेख मिलता है। ‘रक्षिन’ नामक अधिकारी नगरों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होते थे। इसी तरह, गुप्त और मुगल साम्राज्यों के दौरान भी ‘कोतवाल’ जैसे पद थे, जो शहरी क्षेत्रों में पुलिसिंग के कर्तव्यों का निर्वहन करते थे। हालाँकि, यह प्रणाली आज के पुलिस एवं अर्धसैनिक बल की तरह संरचित और केंद्रीकृत नहीं थी; यह काफी हद तक स्थानीय शासकों और जमींदारों पर निर्भर थी।
ब्रिटिश काल: आधुनिक पुलिसिंग की नींव (The British Era: Foundation of Modern Policing)
भारत में आधुनिक पुलिस प्रणाली की वास्तविक नींव ब्रिटिश शासन के दौरान रखी गई थी। 1857 के विद्रोह के बाद, अंग्रेजों को एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस हुई जो उनके शासन को बनाए रखने और किसी भी आंतरिक विद्रोह को दबाने में सक्षम हो।
- 1861 का पुलिस अधिनियम (Police Act of 1861): यह अधिनियम भारतीय पुलिसिंग के इतिहास में एक मील का पत्थर था। इसने भारत में पुलिस का एक संगठित ढाँचा तैयार किया, जो आज भी काफी हद तक लागू है। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा पुलिस बल बनाना था जो सरकार के प्रति वफादार हो और कानून-व्यवस्था बनाए रखे।
- सैन्य प्रकृति (Military Nature): इस अधिनियम के तहत गठित पुलिस बल की प्रकृति अर्ध-सैन्य थी। इसका उद्देश्य केवल अपराध रोकना नहीं, बल्कि ब्रिटिश साम्राज्य के हितों की रक्षा करना भी था। इसी दौरान, विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए कुछ विशेष बलों का गठन भी शुरू हुआ, जिन्हें हम आज के अर्धसैनिक बलों का प्रारंभिक रूप मान सकते हैं।
- असम राइफल्स (Assam Rifles): 1835 में ‘कछार लेवी’ के रूप में स्थापित, असम राइफल्स भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है। इसे पूर्वोत्तर में ब्रिटिश हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था।
स्वतंत्रता के बाद का युग: एक नए अध्याय की शुरुआत (Post-Independence Era: The Beginning of a New Chapter)
1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, पुलिसिंग प्रणाली में एक बड़ा वैचारिक परिवर्तन आया। अब पुलिस का उद्देश्य किसी विदेशी ताकत की सेवा करना नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के नागरिकों की सेवा और सुरक्षा करना था।
- संवैधानिक ढाँचा (Constitutional Framework): भारतीय संविधान ने ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ को राज्य सूची का विषय बनाया। इसका मतलब था कि प्रत्येक राज्य अपने स्वयं के पुलिस बल के गठन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगा।
- केंद्रीय बलों का उदय (Rise of Central Forces): स्वतंत्रता के बाद देश ने कई आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया, जैसे कि राज्यों के बीच सीमा विवाद, उग्रवाद और सांप्रदायिक दंगे। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य पुलिस अक्सर अपर्याप्त साबित होती थी। इसी आवश्यकता ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के विस्तार और गठन को गति दी।
- नए बलों का गठन (Formation of New Forces): केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को आंतरिक अशांति से निपटने के लिए मजबूत किया गया। 1962 के चीन-भारत युद्ध के बाद भारत-तिब्बत सीमा की सुरक्षा के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) का गठन हुआ। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं की सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना की गई। इसी तरह, औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और नेपाल-भूटान सीमाओं के लिए सशस्त्र सीमा बल (SSB) का गठन किया गया।
3. पुलिस बल: राज्य की रीढ़ (Police Force: The State’s Backbone)
भारतीय संविधान के अनुसार, पुलिस एक राज्य का विषय है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश का अपना अलग पुलिस बल होता है, जो उस राज्य की सरकार के प्रति जवाबदेह होता है। राज्य पुलिस बल किसी भी समाज में कानून और व्यवस्था बनाए रखने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। वे नागरिकों के सबसे करीब होते हैं और उनकी दिन-प्रतिदिन की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होते हैं। राज्य के पुलिस एवं अर्धसैनिक बल में, पुलिस की भूमिका सबसे प्रत्यक्ष और जमीनी होती है।
राज्य पुलिस की संरचना (Structure of State Police)
हालांकि हर राज्य की पुलिस संरचना में मामूली अंतर हो सकते हैं, लेकिन मूल ढाँचा लगभग समान होता है, जो एक पदानुक्रम (hierarchy) पर आधारित है।
- पुलिस महानिदेशक (Director General of Police – DGP): यह राज्य पुलिस बल का सर्वोच्च पद होता है। DGP राज्य सरकार और गृह मंत्री को रिपोर्ट करते हैं और पूरे राज्य के पुलिस प्रशासन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
- पुलिस महानिरीक्षक (Inspector General of Police – IGP): एक राज्य को कई क्षेत्रों (Zones) में बांटा जाता है, और प्रत्येक क्षेत्र का प्रमुख एक IGP होता है।
- पुलिस उप महानिरीक्षक (Deputy Inspector General of Police – DIG): एक क्षेत्र (Zone) को कई रेंज (Ranges) में बांटा जाता है, और प्रत्येक रेंज का नेतृत्व एक DIG करता है।
- पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police – SP): प्रत्येक जिले का पुलिस प्रमुख एक SP होता है। छोटे शहरों में SP और बड़े महानगरीय क्षेत्रों में पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) प्रणाली होती है।
- थाना स्तर (Police Station Level): जमीनी स्तर पर, पुलिस स्टेशन (थाना) पुलिसिंग की मूल इकाई है। इसका नेतृत्व एक स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) करता है, जो इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी हो सकता है। उनके अधीन सब-इंस्पेक्टर, सहायक सब-इंस्पेक्टर, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल होते हैं।
पुलिस बल के प्रमुख कार्य (Major Functions of the Police Force)
राज्य पुलिस के कार्यों को मोटे तौर पर निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
- कानून और व्यवस्था बनाए रखना (Maintaining Law and Order): यह पुलिस का सबसे प्रमुख कार्य है। इसमें त्योहारों, रैलियों, और प्रदर्शनों के दौरान शांति सुनिश्चित करना, यातायात का प्रबंधन करना और सार्वजनिक व्यवस्था को भंग होने से रोकना शामिल है।
- अपराध की रोकथाम और जांच (Crime Prevention and Investigation): पुलिस का काम न केवल अपराध होने के बाद उसकी जांच करना है, बल्कि अपराध को होने से रोकना भी है। इसमें गश्त करना, खुफिया जानकारी (intelligence gathering) एकत्र करना और अपराधियों पर नजर रखना शामिल है। अपराध हो जाने पर, पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज करती है, सबूत इकट्ठा करती है, और अपराधियों को पकड़कर अदालत में पेश करती है।
- नागरिकों की सुरक्षा (Security of Citizens): नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करना पुलिस का एक मौलिक कर्तव्य है। इसमें वीआईपी सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और आम जनता को सुरक्षा का احساس दिलाना शामिल है।
- खुफिया जानकारी एकत्र करना (Intelligence Gathering): राज्य स्तर पर, पुलिस के अपने खुफिया विभाग होते हैं जो अपराध, आतंकवाद, और अन्य राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्र करते हैं ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
पुलिस कार्यप्रणाली का विश्लेषण (Analysis of Police Functioning)
भारतीय पुलिस प्रणाली, जो काफी हद तक 1861 के अधिनियम पर आधारित है, की अपनी ताकत और कमजोरियाँ हैं। इसका एक संतुलित विश्लेषण आवश्यक है।
सकारात्मक पहलू (Pros / Sakaratmaka)
- व्यापक उपस्थिति (Widespread Presence): भारत के हर कोने में पुलिस की उपस्थिति है, जो इसे नागरिकों के लिए सबसे सुलभ सुरक्षा एजेंसी बनाती है। किसी भी आपात स्थिति में लोग सबसे पहले पुलिस से ही संपर्क करते हैं।
- विविधता में अनुभव (Experience in Diversity): भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता से निपटने का पुलिस के पास व्यापक अनुभव है। वे स्थानीय संवेदनाओं और मुद्दों को बेहतर ढंग से समझते हैं।
- आपदा में पहली प्रतिक्रिया (First Responders in Disasters): बाढ़, भूकंप या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा के समय पुलिस अक्सर सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचती है और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- अपराध जांच में विशेषज्ञता (Expertise in Crime Investigation): वर्षों के अनुभव के साथ, भारतीय पुलिस ने पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के अपराधों की जांच में विशेषज्ञता हासिल की है, जिसमें फोरेंसिक विज्ञान और साइबर अपराध शामिल हैं।
नकारात्मक पहलू (Cons / Nakaratmaka)
- राजनीतिक हस्तक्षेप (Political Interference): पुलिस पर अक्सर राजनीतिक दबाव का आरोप लगता है, जिससे उनकी निष्पक्षता और स्वायत्तता प्रभावित होती है। तबादलों और पोस्टिंग का इस्तेमाल अक्सर पुलिस अधिकारियों को नियंत्रित करने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जाता है।
- संसाधनों की कमी (Lack of Resources): कई राज्यों में पुलिस बल अपर्याप्त कर्मचारियों, पुराने हथियारों, आधुनिक तकनीक की कमी और अपर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाओं से जूझ रहा है। इससे उनकी कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
- जनता के साथ विश्वास की कमी (Trust Deficit with the Public): भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और असंवेदनशील व्यवहार के आरोपों के कारण पुलिस और जनता के बीच विश्वास की एक गहरी खाई है। कई लोग आज भी पुलिस स्टेशन जाने से डरते हैं।
- अत्यधिक काम का बोझ और तनाव (Overburdened and Stressed): पुलिसकर्मियों को अक्सर लंबे समय तक, बिना किसी छुट्टी के और तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। इसका उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जो उनके प्रदर्शन को भी प्रभावित करता है। यह एक बड़ा कारण है कि पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
4. अर्धसैनिक बल: केंद्र की शक्ति (Paramilitary Forces: The Center’s Strength)
जब स्थिति राज्य पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो जाती है या जब कोई चुनौती राष्ट्रीय स्तर की होती है, तो केंद्र सरकार के विशेष बल, जिन्हें अर्धसैनिक बल कहा जाता है, मैदान में उतरते हैं। ये बल भारतीय सेना और राज्य पुलिस के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। इन्हें ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल’ (Central Armed Police Forces – CAPFs) के रूप में भी जाना जाता है और ये सीधे गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs), भारत सरकार के अधीन काम करते हैं। पुलिस एवं अर्धसैनिक बल की जुगलबंदी भारत की आंतरिक सुरक्षा को बहुस्तरीय और मजबूत बनाती है।
अर्धसैनिक बलों को सेना की तरह प्रशिक्षित किया जाता है, लेकिन उनका मुख्य कार्य देश की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखना होता है, न कि बाहरी आक्रमण से देश की रक्षा करना (जो भारतीय सेना का काम है)। ये बल अत्यधिक गतिशील होते हैं और उन्हें देश के किसी भी हिस्से में, किसी भी समय तैनात किया जा सकता है।
प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (Major Central Armed Police Forces – CAPFs)
भारत में मुख्य रूप से सात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल हैं, जिनमें से प्रत्येक की एक विशिष्ट भूमिका और जिम्मेदारी है।
1. सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force – BSF)
- स्थापना (Establishment): 1 दिसंबर 1965
- आदर्श वाक्य (Motto): जीवन पर्यन्त कर्तव्य (Duty Unto Death)
- मुख्य भूमिका (Primary Role): BSF भारत की प्राथमिक सीमा रक्षक बल है और इसे “भारत की रक्षा की पहली दीवार” (First Wall of Defence of India) कहा जाता है। इसकी मुख्य जिम्मेदारी भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश की सीमाओं पर शांति काल के दौरान निगरानी रखना है।
- कार्य (Functions):
- सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकना।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा करना।
- युद्ध के समय, सेना के साथ मिलकर काम करना और निर्दिष्ट क्षेत्रों की रक्षा करना।
2. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force – CRPF)
- स्थापना (Establishment): 1939 (क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में), 1949 (CRPF अधिनियम के तहत)
- आदर्श वाक्य (Motto): सेवा और निष्ठा (Service and Loyalty)
- मुख्य भूमिका (Primary Role): CRPF भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है और इसे मुख्य रूप से आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात किया जाता है।
- कार्य (Functions):
- राज्यों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना, खासकर दंगों और बड़ी सभाओं के दौरान।
- नक्सलवाद और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाना।
- चुनावों के दौरान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा प्रदान करना।
- वीआईपी सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा। इसकी दो विशेष इकाइयाँ – रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) दंगा नियंत्रण के लिए और कोबरा (CoBRA) बटालियन जंगल युद्ध के लिए प्रसिद्ध हैं।
3. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (Central Industrial Security Force – CISF)
- स्थापना (Establishment): 1969
- आदर्श वाक्य (Motto): संरक्षण एवं सुरक्षा (Protection and Security)
- मुख्य भूमिका (Primary Role): CISF की मुख्य जिम्मेदारी भारत के महत्वपूर्ण औद्योगिक और सरकारी प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करना है।
- कार्य (Functions):
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, दिल्ली मेट्रो, तेल रिफाइनरियों और अन्य संवेदनशील सरकारी भवनों की सुरक्षा करना।
- आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना।
- निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को भी परामर्श और सुरक्षा सेवाएं प्रदान करना।
4. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (Indo-Tibetan Border Police – ITBP)
- स्थापना (Establishment): 1962
- आदर्श वाक्य (Motto): शौर्य – दृढ़ता – कर्म निष्ठा (Valour – Determination – Devotion to Duty)
- मुख्य भूमिका (Primary Role): ITBP को मुख्य रूप से भारत-चीन सीमा पर, लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जचेप ला तक की 3488 किलोमीटर लंबी सीमा की निगरानी और सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है।
- कार्य (Functions):
- उत्तरी सीमाओं पर निगरानी रखना और सीमा उल्लंघन को रोकना।
- सीमावर्ती आबादी में सुरक्षा की भावना को बढ़ावा देना।
- अवैध अप्रवासन और सीमा पार तस्करी को रोकना।
- ये बल पर्वतारोहण और उच्च ऊंचाई वाले युद्ध में माहिर होते हैं।
5. सशस्त्र सीमा बल (Sashastra Seema Bal – SSB)
- स्थापना (Establishment): 1963
- आदर्श वाक्य (Motto): सेवा, सुरक्षा और भाईचारा (Service, Security and Brotherhood)
- मुख्य भूमिका (Primary Role): SSB को भारत-नेपाल और भारत-भूटान की खुली सीमाओं पर तैनात किया गया है। इन देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों के कारण यहाँ की सुरक्षा चुनौतियाँ अलग हैं।
- कार्य (Functions):
- सीमा पार से होने वाले अपराधों और तस्करी को रोकना।
- अवैध गतिविधियों को रोकने और सीमावर्ती आबादी के बीच राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देने के लिए नागरिक कार्रवाई कार्यक्रम चलाना।
- सीमा पर खुफिया जानकारी एकत्र करना।
अन्य महत्वपूर्ण बल (Other Important Forces)
CAPFs के अलावा, कुछ अन्य बल भी हैं जो अर्धसैनिक बलों की श्रेणी में आते हैं और महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- असम राइफल्स (Assam Rifles – AR): यह भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है। यह गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है, लेकिन इसका परिचालन नियंत्रण भारतीय सेना के पास होता है। इसे ‘पूर्वोत्तर का प्रहरी’ भी कहा जाता है और यह मुख्य रूप से भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा और पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए जिम्मेदार है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard – NSG): NSG एक विशिष्ट आतंकवाद विरोधी बल है। इसे ‘ब्लैक कैट्स’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका मुख्य कार्य आतंकवादी हमलों, अपहरण जैसी स्थितियों से निपटना और वीवीआईपी को सुरक्षा प्रदान करना है। 26/11 मुंबई हमलों के दौरान NSG की भूमिका सराहनीय थी।
ये सभी बल मिलकर भारत के पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के ढांचे को पूरा करते हैं, जो देश को विभिन्न प्रकार के आंतरिक खतरों से बचाता है।
5. पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के बीच समन्वय: एक अनिवार्य आवश्यकता (Coordination Between Police and Paramilitary Forces: A Critical Necessity)
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में, जहाँ सुरक्षा चुनौतियाँ जटिल और बहुआयामी हैं, किसी एक एजेंसी के लिए अकेले सभी खतरों से निपटना संभव नहीं है। आंतरिक सुरक्षा की प्रभावशीलता बहुत हद तक राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बीच सहज समन्वय और सहयोग पर निर्भर करती है। पुलिस एवं अर्धसैनिक बल जब एक टीम के रूप में काम करते हैं, तो उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। यह समन्वय विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों, बड़े पैमाने पर होने वाले दंगों, आपदा प्रबंधन और चुनावों के शांतिपूर्ण संचालन के दौरान महत्वपूर्ण हो जाता है।
समन्वय की आवश्यकता क्यों है? (Why is Coordination Needed?)
- स्थानीय जानकारी और केंद्रीय विशेषज्ञता का संगम (Fusion of Local Intel and Central Expertise): राज्य पुलिस के पास स्थानीय भाषा, भूगोल और लोगों की गहरी समझ होती है। उनके पास मुखबिरों (informers) का एक नेटवर्क होता है, जो जमीनी स्तर की खुफिया जानकारी प्रदान करता है। वहीं, अर्धसैनिक बलों के पास बेहतर हथियार, कठोर प्रशिक्षण और विशेष अभियानों का अनुभव होता है। जब ये दोनों मिलते हैं, तो अभियान की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
- संसाधनों का इष्टतम उपयोग (Optimal Utilization of Resources): समन्वय से संसाधनों जैसे कि जनशक्ति, हथियार, वाहन और संचार उपकरणों का दोहराव और बर्बादी रुकती है। एक संयुक्त अभियान में, दोनों बल अपने-अपने संसाधनों को साझा कर सकते हैं, जिससे उनकी समग्र क्षमता बढ़ती है।
- त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया (Quick and Effective Response): किसी बड़ी घटना के दौरान, जैसे कि आतंकवादी हमला, प्रभावी समन्वय से एक एकीकृत कमांड और कंट्रोल संरचना स्थापित की जा सकती है। इससे निर्णय लेने में तेजी आती है और भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है, जैसा कि 26/11 मुंबई हमलों के शुरुआती घंटों में देखा गया था।
- विश्वास निर्माण (Confidence Building): जब नागरिक देखते हैं कि राज्य और केंद्र की एजेंसियां मिलकर उनकी सुरक्षा के लिए काम कर रही हैं, तो इससे उनका व्यवस्था पर विश्वास बढ़ता है। यह आंतरिक सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक माहौल बनाता है।
समन्वय के तंत्र (Mechanisms for Coordination)
भारत सरकार और राज्य सरकारों ने पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कई तंत्र स्थापित किए हैं।
- मल्टी-एजेंसी सेंटर (Multi-Agency Centre – MAC): यह एक खुफिया-साझाकरण ग्रिड है, जिसका नेतृत्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) करता है। यह केंद्र और राज्यों की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों से खुफिया जानकारी एकत्र करता है, उनका विश्लेषण करता है और उन्हें वास्तविक समय में संबंधित एजेंसियों के साथ साझा करता है।
- संयुक्त अभियान (Joint Operations): नक्सलवाद और आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में अक्सर राज्य पुलिस और सीआरपीएफ या अन्य CAPFs द्वारा संयुक्त अभियान चलाए जाते हैं। इन अभियानों की योजना और निष्पादन संयुक्त रूप से किया जाता है।
- एकीकृत कमान (Unified Command): जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर जैसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में, एक एकीकृत कमान संरचना स्थापित की गई है। इसमें सेना, अर्धसैनिक बल और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं, जो राज्यपाल या मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मिलकर रणनीति बनाते हैं।
- नियमित बैठकें और प्रशिक्षण (Regular Meetings and Training): गृह मंत्रालय नियमित रूप से राज्य पुलिस प्रमुखों और CAPF प्रमुखों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित करता है। इसके अलावा, संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास भी आयोजित किए जाते हैं ताकि दोनों बलों के कर्मी एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझ सकें।
समन्वय में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण (Analysis of Challenges in Coordination)
एक प्रभावी समन्वय तंत्र स्थापित करना सैद्धांतिक रूप से जितना आसान लगता है, व्यावहारिक रूप से उतना ही चुनौतीपूर्ण है। पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के बीच समन्वय में कई बाधाएँ आती हैं।
सकारात्मक पहलू (Pros / Sakaratmaka)
- सफलता की कहानियाँ (Success Stories): कई मौकों पर, जैसे कि पंजाब में आतंकवाद को खत्म करने या पूर्वोत्तर में उग्रवाद को नियंत्रित करने में, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बीच उत्कृष्ट समन्वय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- संरचित तंत्र का अस्तित्व (Existence of Structured Mechanisms): MAC और यूनिफाइड कमांड जैसे तंत्रों ने खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त योजना बनाने के लिए एक औपचारिक मंच प्रदान किया है, जिससे समन्वय में सुधार हुआ है।
- आपदा प्रबंधन में सहयोग (Collaboration in Disaster Management): राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), जो मुख्य रूप से CAPFs से बना है, राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर आपदाओं के दौरान सराहनीय काम करता है।
नकारात्मक पहलू (Cons / Nakaratmaka)
- अहं का टकराव (Ego Clashes): विभिन्न बलों के अधिकारियों के बीच वरिष्ठता और अधिकार क्षेत्र को लेकर अक्सर अहं का टकराव होता है। राज्य पुलिस को यह महसूस हो सकता है कि केंद्रीय बल उनके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जबकि केंद्रीय बल राज्य पुलिस को अक्षम मान सकते हैं।
- विश्वास की कमी (Lack of Trust): कई बार राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने में विश्वास की कमी होती है। एक-दूसरे पर जानकारी लीक होने का डर प्रभावी सहयोग में बाधा डालता है।
- नेतृत्व और कमान की समस्या (Leadership and Command Issues): संयुक्त अभियानों के दौरान, यह स्पष्ट नहीं होता कि अंतिम कमान किसके पास होगी – राज्य पुलिस के अधिकारी के पास या अर्धसैनिक बल के कमांडर के पास। यह भ्रम और देरी का कारण बन सकता है।
- वेतन और सुविधाओं में अंतर (Disparity in Pay and Facilities): केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को राज्य पुलिस की तुलना में बेहतर वेतन, भत्ते और सुविधाएँ मिलती हैं। यह राज्य पुलिस के मनोबल को प्रभावित कर सकता है और दोनों बलों के बीच एक तरह की प्रतिद्वंद्विता पैदा कर सकता है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के कर्मियों के बीच इस तरह की असमानताओं को कम किया जाए।
6. भर्ती प्रक्रिया और प्रशिक्षण: ढाल को तैयार करना (Recruitment Process and Training: Forging the Shield)
किसी भी सुरक्षा बल की ताकत उसके जवानों के कंधों पर होती है। इसलिए, सही उम्मीदवारों का चयन करना और उन्हें विश्व स्तरीय प्रशिक्षण देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुलिस एवं अर्धसैनिक बल में भर्ती और प्रशिक्षण की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि देश की सुरक्षा के लिए केवल सबसे योग्य, शारीरिक रूप से फिट और मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति ही चुने जाएं। यह प्रक्रिया युवाओं के लिए देश सेवा का एक प्रतिष्ठित मार्ग भी प्रदान करती है।
पुलिस बल में भर्ती (Recruitment in Police Force)
चूंकि पुलिस एक राज्य का विषय है, इसलिए भर्ती प्रक्रिया राज्य स्तर पर आयोजित की जाती है और हर राज्य के अपने नियम और भर्ती बोर्ड होते हैं।
- कांस्टेबल (Constable): यह पुलिस बल में प्रवेश स्तर का पद है। भर्ती आमतौर पर राज्य पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित की जाती है।
- योग्यता: आमतौर पर 10+2 (12वीं पास)।
- चयन प्रक्रिया: इसमें लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Efficiency Test – PET) जैसे दौड़, लंबी कूद, और शारीरिक मानक परीक्षण (Physical Standard Test – PST) जैसे ऊंचाई, छाती का माप शामिल होता है। इसके बाद मेडिकल जांच और दस्तावेज़ सत्यापन होता है।
- सब-इंस्पेक्टर (Sub-Inspector – SI): यह एक पर्यवेक्षी भूमिका है।
- योग्यता: किसी भी विषय में स्नातक (Graduate)।
- चयन प्रक्रिया: यह अधिक प्रतिस्पर्धी होती है और इसमें एक कठिन लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षण, और साक्षात्कार शामिल होता है।
- भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service – IPS): यह एक अखिल भारतीय सेवा है। IPS अधिकारी राज्य पुलिस बलों में नेतृत्व के पदों (SP से लेकर DGP तक) पर नियुक्त होते हैं।
- चयन प्रक्रिया: इनका चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Examination) के माध्यम से होता है। यह भारत की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक है।
अर्धसैनिक बलों में भर्ती (Recruitment in Paramilitary Forces)
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPFs) में भर्ती राष्ट्रीय स्तर पर होती है और विभिन्न एजेंसियों द्वारा आयोजित की जाती है।
- कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी – GD) (Constable – General Duty):
- चयन प्रक्रिया: यह भर्ती कर्मचारी चयन आयोग (Staff Selection Commission – SSC) द्वारा आयोजित की जाती है। SSC GD परीक्षा के माध्यम से BSF, CISF, CRPF, ITBP, SSB और असम राइफल्स में कांस्टेबलों की भर्ती की जाती है। प्रक्रिया में कंप्यूटर आधारित परीक्षा, PET/PST और विस्तृत चिकित्सा जांच शामिल है।
- सब-इंस्पेक्टर (Sub-Inspector):
- चयन प्रक्रिया: SSC केंद्रीय पुलिस संगठन (Central Police Organisation – CPO) परीक्षा के माध्यम से दिल्ली पुलिस और CAPFs में सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती करता है।
- सहायक कमांडेंट (Assistant Commandant – AC): यह CAPFs में एक ग्रुप ‘A’ राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) का पद है, जो कंपनी कमांडर के बराबर होता है।
- चयन प्रक्रिया: इनकी भर्ती संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सहायक कमांडेंट) परीक्षा के माध्यम से होती है। इसमें लिखित परीक्षा, शारीरिक और चिकित्सा परीक्षण, और एक विस्तृत साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण शामिल होता है।
प्रशिक्षण: एक सैनिक का निर्माण (Training: Making of a Soldier)
भर्ती के बाद, चयनित उम्मीदवारों को कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है जो उन्हें शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से उनकी भविष्य की भूमिकाओं के लिए तैयार करता है।
- शारीरिक प्रशिक्षण (Physical Training): इसमें सहनशक्ति (endurance), शक्ति और चपलता बढ़ाने के लिए कठोर शारीरिक व्यायाम, बाधा कोर्स (obstacle courses) और ड्रिल शामिल हैं।
- हथियार प्रशिक्षण (Weapons Training): प्रशिक्षुओं को विभिन्न प्रकार के छोटे और बड़े हथियारों को संभालने, चलाने और बनाए रखने का प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें फायरिंग रेंज में गहन अभ्यास कराया जाता है।
- कानूनी शिक्षा (Legal Education): पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और साक्ष्य अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनों की शिक्षा दी जाती है, ताकि वे अपनी शक्तियों का सही और कानूनी रूप से उपयोग कर सकें।
- विशेषज्ञ प्रशिक्षण (Specialized Training): उनकी तैनाती के आधार पर, उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। उदाहरण के लिए, BSF के जवानों को सीमा प्रबंधन, ITBP के जवानों को पर्वतारोहण, और CRPF के कोबरा कमांडो को जंगल युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता है।
- मानसिक और मनोवैज्ञानिक कंडीशनिंग (Mental and Psychological Conditioning): प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शारीरिक शक्ति का निर्माण करना नहीं है, बल्कि जवानों को तनावपूर्ण और खतरनाक परिस्थितियों में शांत और निर्णायक रहने के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी है।
7. आधुनिकीकरण और भविष्य की चुनौतियाँ (Modernization and Future Challenges)
21वीं सदी में सुरक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अपराध और आतंकवाद के तरीके बदल गए हैं। आज की चुनौतियाँ केवल भौतिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साइबरस्पेस और सूचना के क्षेत्र में भी फैल गई हैं। इन नई चुनौतियों का सामना करने के लिए, भारत के पुलिस एवं अर्धसैनिक बल को लगातार आधुनिकीकरण और सुधार की आवश्यकता है। भविष्य की तैयारी के लिए हमें वर्तमान की कमजोरियों को दूर करना होगा और नई तकनीकों को अपनाना होगा।
आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए कदम (Steps Towards Modernization)
सरकार ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों को आधुनिक बनाने के लिए कई पहल की हैं:
- तकनीकी उन्नयन (Technological Upgradation): बलों को आधुनिक हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट, नाइट विजन डिवाइस और बेहतर संचार उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग बढ़ रहा है।
- साइबर सुरक्षा (Cyber Security): साइबर अपराध और ऑनलाइन कट्टरता से निपटने के लिए विशेष साइबर सेल स्थापित किए जा रहे हैं। पुलिसकर्मियों को डिजिटल फोरेंसिक और साइबर जांच में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- डेटाबेस और एनालिटिक्स (Databases and Analytics): अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (CCTNS) जैसी परियोजनाओं का उद्देश्य सभी पुलिस स्टेशनों को एक नेटवर्क से जोड़ना है, जिससे अपराध डेटा का विश्लेषण करना और अपराधियों को ट्रैक करना आसान हो सके।
- बेहतर मोबिलिटी (Improved Mobility): बलों को किसी भी स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए बेहतर और तेज वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
भविष्य की प्रमुख चुनौतियाँ (Major Future Challenges)
आधुनिकीकरण के प्रयासों के बावजूद, पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के सामने कई गंभीर चुनौतियाँ हैं जिनसे भविष्य में निपटना होगा।
- साइबर आतंकवाद और सूचना युद्ध (Cyber Terrorism and Information Warfare): दुश्मन ताकतें अब सीधे टकराव के बजाय सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग करके गलत सूचना फैलाने, नफरत भड़काने और देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। इससे निपटना एक बड़ी चुनौती है।
- शहरी आतंकवाद (Urban Terrorism): घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में आतंकवादी हमलों से निपटना अधिक जटिल होता है, क्योंकि इसमें नागरिकों के हताहत होने का खतरा अधिक होता है। इसके लिए विशेष रणनीति और प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
- कर्मियों का मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health of Personnel): लगातार तनाव, लंबे काम के घंटे और खतरनाक परिस्थितियों में काम करने से जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। आत्महत्या और अवसाद की बढ़ती घटनाएं एक गंभीर चिंता का विषय हैं।
- पुलिस सुधार (Police Reforms): भारतीय पुलिस प्रणाली में सुधार की मांग लंबे समय से की जा रही है। राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करना, जवाबदेही बढ़ाना, और पुलिस को वास्तव में लोगों के अनुकूल बनाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों को पूरी तरह से लागू करना अभी भी बाकी है।
- बदलती सामाजिक संरचना (Changing Social Fabric): तेजी से शहरीकरण, प्रवासन और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के कारण नए प्रकार के अपराध और सामाजिक तनाव पैदा हो रहे हैं। पुलिस को इन बदलती वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील और अनुकूल होना होगा।
8. निष्कर्ष: भारत की अजेय ढाल (Conclusion: India’s Invincible Shield)
भारत की विशालता और जटिलता को देखते हुए, इसकी आंतरिक शांति और स्थिरता बनाए रखना एक असाधारण कार्य है। यह कार्य हमारे पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के लाखों जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान के कारण ही संभव हो पाता है। वे दिन-रात, हर मौसम में, देश के हर कोने में हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। राज्य पुलिस जहाँ हमारे दैनिक जीवन में कानून-व्यवस्था की पहली दीवार है, वहीं अर्धसैनिक बल उन बड़ी और गंभीर चुनौतियों से निपटते हैं जो देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करती हैं।
यह सच है कि इस प्रणाली में कई कमियाँ और चुनौतियाँ हैं – राजनीतिक हस्तक्षेप से लेकर संसाधनों की कमी और जनता के साथ विश्वास की कमी तक। इन मुद्दों को दूर करने के लिए निरंतर सुधार और आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद, हमारे सुरक्षा बलों का योगदान अमूल्य है। उन्होंने अनगिनत बार देश को संकट से उबारा है और अपनी जान की परवाह किए बिना नागरिकों की रक्षा की है। पुलिस एवं अर्धसैनिक बल वास्तव में भारत की ढाल हैं, जो हमें बाहरी और आंतरिक खतरों से बचाते हैं, ताकि राष्ट्र प्रगति और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ सके। एक नागरिक के रूप में, हमारा भी यह कर्तव्य है कि हम उनके काम का सम्मान करें, कानूनों का पालन करें और एक सुरक्षित समाज के निर्माण में उनका सहयोग करें।
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: पुलिस और अर्धसैनिक बल में मुख्य अंतर क्या है? (What is the main difference between Police and Paramilitary Forces?)
उत्तर: मुख्य अंतर उनके अधिकार क्षेत्र और नियंत्रण में है। पुलिस एक राज्य का विषय है और राज्य सरकार के अधीन काम करती है। इसका मुख्य कार्य राज्य के भीतर कानून-व्यवस्था बनाए रखना और अपराध की जांच करना है। दूसरी ओर, अर्धसैनिक बल (CAPFs) केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन काम करते हैं। उन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए कहीं भी तैनात किया जा सकता है, जैसे सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और दंगों को नियंत्रित करना। सरल शब्दों में, पुलिस स्थानीय सुरक्षा के लिए है और अर्धसैनिक बल राष्ट्रीय स्तर की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए हैं।
प्रश्न 2: क्या अर्धसैनिक बल भारतीय सेना का हिस्सा हैं? (Are Paramilitary Forces part of the Indian Army?)
उत्तर: नहीं, अर्धसैनिक बल भारतीय सेना का हिस्सा नहीं हैं। भारतीय सेना (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) रक्षा मंत्रालय के अधीन आती है और इसका मुख्य कार्य बाहरी आक्रमण से देश की रक्षा करना है। अर्धसैनिक बल (जैसे CRPF, BSF) गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं और उनका मुख्य कार्य आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, युद्ध की स्थिति में, कुछ अर्धसैनिक बलों को सेना की कमान के तहत काम करने के लिए सौंपा जा सकता है।
प्रश्न 3: भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल कौन सा है? (Which is the oldest paramilitary force in India?)
उत्तर: भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल असम राइफल्स (Assam Rifles) है। इसकी स्थापना 1835 में ब्रिटिश सरकार द्वारा ‘कछार लेवी’ के नाम से की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में ब्रिटिश बस्तियों और चाय के बागानों की रक्षा करना था। आज भी यह पूर्वोत्तर में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रश्न 4: रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और कोबरा (CoBRA) क्या हैं? (What are Rapid Action Force (RAF) and CoBRA?)
उत्तर: RAF और CoBRA दोनों केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की विशेष इकाइयाँ हैं।
- रैपिड एक्शन फोर्स (RAF): यह दंगा और भीड़ नियंत्रण स्थितियों से निपटने के लिए एक विशेष रूप से प्रशिक्षित बल है। इसकी वर्दी नीले कैमोफ्लाज पैटर्न की होती है। RAF को संवेदनशील स्थितियों में न्यूनतम बल का उपयोग करके कानून-व्यवस्था बहाल करने में विशेषज्ञता हासिल है।
- कोबरा (CoBRA – Commando Battalion for Resolute Action): यह एक विशिष्ट जंगल युद्ध कमांडो इकाई है। इसका गठन भारत में नक्सलवाद की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए किया गया था। कोबरा कमांडो गुरिल्ला युद्ध में माहिर होते हैं।
प्रश्न 5: एक आम नागरिक पुलिस एवं अर्धसैनिक बल की मदद कैसे कर सकता है? (How can a common citizen help the Police and Paramilitary Forces?)
उत्तर: एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में, आप कई तरह से मदद कर सकते हैं:
- कानून का पालन करें: कानूनों और नियमों का पालन करना सुरक्षा बलों की मदद करने का सबसे अच्छा तरीका है।
- सत्यापित जानकारी साझा करें: अफवाहों और झूठी खबरों को फैलाने से बचें, क्योंकि इससे अनावश्यक तनाव और अशांति फैल सकती है।
- सतर्क रहें: अपने आस-पास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। आपकी एक छोटी सी जानकारी किसी बड़ी घटना को रोक सकती है।
- सहयोग करें: जांच या किसी अन्य आधिकारिक कार्य के दौरान सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करें।
- सम्मान करें: उनके बलिदान और सेवा का सम्मान करें। वे कठिन परिस्थितियों में हमारे लिए काम करते हैं।

